Chalisa · Santoshi Mata
Santoshi Mata Chalisa
श्री संतोषी माता चालीसा
श्री संतोषी माता चालीसा complete Hindi text with दोहा, चौपाई, सरल अर्थ and traditional पाठ-विधि from Divine Astrology House.
Complete Paath
॥ दोहा ॥
श्री गणपति पद नाय सिर, धरि हिय शारदा ध्यान।
सन्तोषी मां की करूँ, कीरति सकल बखान॥
॥ चौपाई ॥
जय संतोषी मां जग जननी।
खल मति दुष्ट दैत्य दल हननी॥
तुम्हरो नाम जगत में छाया।
सकल मनोरथ तुरत कराया॥
दूर्वा दल फल फूल चढ़ावें।
भक्त तुम्हारे मन वांछित पावें॥
शुक्रवार का व्रत जो धारे।
सकल मनोरथ उसके पूरे॥
गुड़ चना का भोग लगावें।
सन्तोषी मां को अति भावें॥
खटाई का भोजन नहिं खाते।
व्रत नियम से मन को साधते॥
जिनके मन में भाव तुम्हारा।
तिनके संकट हरहु हमारा॥
दीन दुखी जो शरण में आवे।
माता उसकी विपदा टारे॥
सन्तोषी मां नाम तुम्हारा।
सुख सम्पत्ति देहु अपारा॥
सन्तानहीन जो जन ध्यावे।
सुपुत्र सुपुत्री वह पावे॥
रोग शोक सब दूर भगावो।
मनवांछित फल उसको पावो॥
धन धान्य से घर भर जावे।
माता उसकी लाज बचावे॥
जो नर नारी ध्यान लगावें।
सकल सिद्धि संपत्ति पावें॥
शुक्रवार को कथा सुनावें।
मनवांछित फल निश्चय पावें॥
कलह क्लेश घर में न आवे।
सुख शांति का वास करावे॥
भूत प्रेत बाधा सब टारे।
माता अपने भक्त उबारे॥
सन्तोषी मां अति सुखदानी।
महिमा तेरी अमित बखानी॥
ब्रह्मा विष्णु महेश मनावें।
नारद मुनि गुण गावत गावें॥
देव दनुज नर सब सिर नावे।
माता के गुण नित गुन गावें॥
जिस घर तेरा नाम पुकारा।
मंगलमय हो वह घर सारा॥
दुःख दरिद्रता दूर भगावो।
सुख सम्पत्ति घर में लावो॥
मन की चिंता दूर करो मां।
भक्तन की सब पीर हरो मां॥
माता तेरी महिमा भारी।
तुम बिन कौन करे रखवारी॥
जो कोई तेरी शरण में आता।
तू उसकी बिगड़ी बनाता॥
भूल चूक जो होय हमारी।
क्षमा करो हे मातु दुलारी॥
दीन दयालु मातु भवानी।
सब पर करो कृपा कल्याणी॥
जो यह चालीसा नित गावे।
सो नर सुख सम्पत्ति पावे॥
सन्तोषी मां की जय बोले।
उसके बंद भाग्य सब खोले॥
श्रद्धा भक्ति हृदय में धारे।
माता उसके काज सँवारे॥
संकट में जो तुम्हें पुकारे।
तुम तुरत उसकी विपदा टारे॥
सन्तोषी मां मंगलकारी।
जय जय जय जग की हितकारी॥
॥ अंतिम दोहा ॥
सन्तोषी माँ के सदा, बन्दहुँ पग निश वास।
पूर्ण मनोरथ हों सकल, मात हरौ भव त्रास॥
सरल हिन्दी अर्थ (Simple Hindi Meaning)
इस चालीसा में माँ संतोषी की कृपा से संतोष, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना है।
Traditional Reading Guidance (Paath Vidhi)
शुक्रवार को स्नानादि से निवृत्त हो स्वच्छ वस्त्र पहनें। माँ संतोषी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक, गुड़-चना भोग रखें और फूल अर्पित कर पाठ करें।
Benefits & Significance
पारंपरिक मान्यता अनुसार नियमित पाठ से संतोष, सुख-शांति और घर-परिवार की समस्याओं में राहत मिलती है। यह धार्मिक विश्वास है, कोई चिकित्सकीय या निश्चित परिणाम का दावा नहीं।
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